बस! एक शून्य...और कुछ नहीं.... सच पूछो तो आज भी कुछ लिखने के लिए मन इजाजत नहीं दे रहा...फिर भी हाथ अपने आप ही की-बोर्ड पर चल रहे है.लिखनेके लिए न कोई विषय सूझ रहा है, और न तो कोई कहीं से भी प्रेरणा ही मिल रही है. ऐसा लग रहा है कि...लिखना मेरा का
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मेरे ब्लोग हिंदी में क्यों होते है? ऐसी बात नहीं है कि मै इंग्लिश में नहीं लिख सकती और इसलिए हिंदी में लिख रही हूं. बल्कि कुछ साल पहले तक मेरा कमांड इंग्लिश पर ही था... पर तब भी मेरी दिली इच्छा हिंदी मे ही लिखने की होती रहती थी. मै स्वयं हिंदी भ
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जीवन में रावण से खुशियां है...राम से नहीं! मैने ग़लत क्या कहा? अब देखिए..जीवन में खुशियां भी मिलती है और ग़म भी मिलते है... पर खुशियां याद कम ही रहती है... और ग़म भूले नहीं भूलाते! ऐसा क्यों होता है? क्यों रात बडी और दिन छोटे लगते है? क्यों कि हम
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एंड्रयू सायमंड की हरकतें.... ये साहब,अपने आप को ऑस्ट्रेलिया की क्रिकेट टीम का एक प्लेयर ही समझें तो अच्छा है! कुछ दिनों से एंड्रयू सायमंड लगातार टीम इंडिया के प्लेयर्स पर फबतिया कसनेका काम कर रहे है. कभी श्रीसंत पर तो कभी
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क्रिकेट के प्रति प्रेम..या दीवानगी? टीम इंडिया जीत गया... जश्न मनाओ, पटाखे चलाओ, पार्टियां दो, एक दूसरे को गिफ्ट्स दो.. वह सबकुछ करो जो आप किसी खुशी के मिलने से करते है.. ऐसे कि जैसे आपकी कोई दिली तमन्ना पूरी हुई हो. भाई वाह्! हम तो मान गए आ
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